सनातन धर्म में पुत्री और पुत्र को बराबर के सम्मान और अधिकार दिए गए हैं और कहीं-कहीं तो पुत्री को पुत्र से भी अधिक सम्मान दिया गया है
होशियारपुर/दलजीत अजनोहा
राधा कृष्ण मंदिर में राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज जी के सानिध्य में दोपहर 1:00 से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से पधारे संत श्री गौरदास जी महाराज ने आज बताया की नंद बाबा और भानु बाबा दोनों परम मित्र थे और दोनों ने आपस में यह वचन दिया था किसी एक के पुत्र और दूसरे के पुत्री होगी तो हम दोनों समधि बन जाएंगे नंद बाबा के यहां भगवान कृष्ण जी ने अवतार ले लिया तो भानु बाबा जी ने प्रभु की तपस्या करी हमारे यहां ऐसी कन्या प्रकट हो जो भगवान को भी भक्ति और सेवा से प्रसन्न कर ले महाराज जी ने बताया हमारे यहां कन्या अवतरित हो इसके लिए भी राजा और भक्त लोग तपस्या किया करते थे हमारे सनातन धर्म में पुत्री और पुत्र को बराबर के सम्मान और अधिकार दिए गए हैं और कहीं-कहीं तो पुत्री को पुत्र से भी अधिक सम्मान दिया गया है कथा स्थल में राधा जी का जन्मोत्सव भी बहुत धूमधाम से मनाया गया आगे भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने बताया भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं भी मनमोहक और शिक्षा प्रदान करने वाली है भगवान श्री कृष्ण ने 6 दिन की आयु में पूतना राक्षसी का और श्री राम जी ने बचपन में सबसे पहले ताड़का राक्षसी का वध किया था यह अज्ञानता का सूचक मानी जाती है इसलिए अज्ञान को समाप्त करने के बाद ही हम भक्ति की ओर बढ़ सकते हैं जैसे कन्हैया ने मां यशोदा की दादी सास के जमाने की मटकी को तोड़कर जता दिया की प्रभु के अलावा किसी भी चीज में आसकती नहीं करनी चाहिए हमारी आसक्ति केवल प्रभु और प्रभु के भक्तों एवं उनकी सेवा में ही होनी चाहिए
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