राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने की प्रथा लोकतंत्र के लिए घातक --- तीक्षण सूद




होशियारपुर/दलजीत अजनोहा 
पंजाब ,हरियाणा ,चंडीगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री अश्वनी मिश्रा के शपथ समारोह को रोकने के लिए पंजाब सरकार द्वारा कैबिनेट में पास कीये गये प्रस्ताव को लोकतंत्र के लिए घातक बताते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद ने इसकी कड़ी निंदा की है।
स्वयं वकालत के पेशे से संबधित श्री सूद ने कहा कि भारत के संविधान में विधायिका ,कार्यपालिका ,तथा न्यायपालिका को अलग -अलग शक्तियां प्रदान की गई है। विधायिका का काम कानून तथा नियम बनाना , कार्यपालिका का काम उन्हें लागू करवाना तथा न्यायपालिका का काम उन्हे संविधान की कसौटी परख कर उसकी व्याख्या करना है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान में यकीनी बनाई गई। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति माननीय उच्चतम न्यायालय की कॉलेजियम द्वारा की जाती है तथा राज्य सरकार को केवल उसकी जानकारी भेजी जाती है। राज्य सरकार को उस पर वीटो करने का कोई अधिकार नहीं होता। फिर भी ऐसे मामलो को कैबिनेट में लाना तथा मीडिया में उछाल कर न्यायपालिका पर दबाव बनाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि आप नेता पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश पर अनगर्ल आरोप लगाकर अदालतों का बायकाट आदि भी कर चुके है जो कि अत्यंत निंदनीय है। ऐसे असंवैधानिक तरीके से वह चुनी हुई है सरकार की शक्तियों का गलत प्रयोग करके न्याय प्रणाली में दखलअंदाजी करके लोगों में न्यायतंत्र को बदनाम कर रहे है जोकि देश के लोकतंत्र के लिए बहुत ही हानिकारक सिद्ध होने वाला है। लोगों को ऐसी चालों से सचेत रहने की जरूरत है।

Comments