होशियारपुर/दलजीत अजनोहा
शिमला पहाड़ी चौंक पर बरसात के दिनों में भारी पानी की जमावट के समाधान के लिए पानी को मोटर से उठाकर चौ में डालने के लिए करोड़ो की लागत से एक योजना बनाई गई थी। वह बुरी तरह असफ़ल हो चुकी है। पिछले 2 महीनो में हुई थोड़ी सी बारिश में भी जमा हुए पानी की निकासी ने इस योजना पर बहुत से सवाल खड़े कर दिए है। पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद ने कहा है कि इस योजना के शुरू होने से पहले ही उन्होंने प्रेस के माध्यम से इसकी सफलता पर प्रश्न चिन्ह लगाया था जो की अब सही साबित हुआ। इस प्रोजेक्ट के फेल होने से सरकार का करोड़ो रुपया तो डूबा ही है परन्तु सबसे अधिक खेद इस बात का है, शहर के बीचो -बीच स्थित सौ बर्षो से अधिक पुराना शिमला पहाड़ी पार्क का मूल ढांचा नहस -तहस कर दिया गया। शिमला पहाड़ीयहां स्कूलो के बच्चों के खेलने से चहल -पहल रहती थी अब इसकी तोड़ -फोड़ से पार्क में वीरानी का महौल छाया हुआ है। शिमला पहाड़ी एक पुरातत्व ढांचा था। जिससे कानूनन छेड़ -छाड़ नहीं की जा सकती थी। इस पार्क का बहुत बड़ा हिस्सा सीवरेज योजना के अंर्तगत आने से टेंक आदि इमारतों को बदल दिया गया। इस कार्य से बहुत से पेड़ -पौधे उखाड़े जा चुके है मोहल्ला निवासियो के रोष के कारन अब जो मुरमत की जा रही है उससे शिमला पहाड़ी का मूल ढांचा नहस -तहस हो गया है। उन्होंने शिमला पहाड़ी को पुन: मूल रूप में बहाल करने की मांग करते हुए कहा है कि इस योजना के फेल होने की उच्च स्तरीय करवाई जाये। उन्होंने यह भी कहा है कि पार्क को क्षति पहुंचाने के विरुध राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के पास भी शिकायत की जायेगी।
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