चंडीगढ़ की तर्ज पर हिमाचल में दिव्यांगों को प्राथमिकता दिलाएं राज्यपाल: सूद-खन्ना• नवदीप सूद व अविनाश राय खन्ना ने हिमाचल राज्यपाल को सौंपा दिव्यांग अधिकारों का ज्ञापन• दिव्यांगों के वैधानिक अधिकार लागू करवाने को राज्यपाल से मिले सूद-खन्ना• धारा 25(1)(c) लागू करवाने के लिए हिमाचल राज्यपाल से हस्तक्षेप की गुहार- नवदीप सूद• नवदीप सूद व पूर्व सांसद खन्ना ने राज्यपाल से दिव्यांगों के अधिकार लागू करवाने की मांग की
होशियारपुर/दलजीत अजनोहा
दिव्यांगजनों को अस्पतालों में प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर आत्मसुख आत्मदेव आश्रम (फॉर लिविंग गॉड्स), होशियारपुर के अध्यक्ष नवदीप सूद तथा पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 25(1)(c) को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इस धारा में दिव्यांगजनों को अस्पतालों में उपस्थिति एवं उपचार में प्राथमिकता देने का स्पष्ट प्रावधान है।
नवदीप सूद, अध्यक्ष आत्मसुख आश्रम ने माननिय राज्यपाल को बताया कि कानून होने के बावजूद दिव्यांग व्यक्तियों को आज भी अस्पतालों में पंजीकरण, ओपीडी, जांच, दवा और उपचार के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। बौद्धिक दिव्यांग, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित तथा चलने-फिरने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए लंबी प्रतीक्षा गंभीर परेशानी का कारण बनती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को प्राथमिकता देना दया या रियायत नहीं, बल्कि संसद द्वारा दिया गया वैधानिक अधिकार है।
ज्ञापन में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा 17 मार्च 2026 को जारी निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वहां सरकारी अस्पतालों में दिव्यांगजनों के लिए प्राथमिकता काउंटर, फास्ट-ट्रैक व्यवस्था, स्टाफ की संवेदनशीलता तथा प्रमुख स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाने की व्यवस्था की गई है।
इस अवसप पर श्री नवदीप सूद एंवम श्री अविनाश राय खन्ना ने राज्यपाल से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा स्वास्थ्य संस्थानों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करवाई जाए।
उन्होंने मांग की कि दिव्यांगजनों को पंजीकरण, ओपीडी, जांच, फार्मेसी और उपचार में प्राथमिकता मिले, अस्पतालों में “दिव्यांगजनों को प्राथमिकता” के बोर्ड लगाए जाएं तथा शिकायतों के समाधान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
नवदीप सूद ने कहा कि कानून तभी सार्थक है, जब उसका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक वास्तव में पहुंचे।
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