श्री कृष्ण और श्री कृष्ण के प्यारो की कथाएं एवं चरित्र सुने और श्रवण भक्ति में केवल भक्ति ही हो/स्वामी गौर दास
ऊना(हिमाचल प्रदेश)/दलजीत अजनोहा
श्री राधा कृष्ण मंदिर में राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज जी के साहित्य में दोपहर 1:00 बजे से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से पधारे परम श्रद्धेय संत श्री गौर दास जी महाराज ने आज बताया कि राजा परीक्षित अपना राज काज छोड़कर गंगा किनारे शुकताल पर संतों की सभा में आकर बैठ गए और बोले 7 दिन बाद मेरी मृत्यु होने वाली है जो जो संत या सद्गुरु मेरे कल्याण का रास्ता बता दे वह इस आसन पर आकर बैठ जाए इतने शुकदेव जी आए और इधर देखा ना उधर सीधे आकर सिंहासन पर बैठ गए और बोले परीक्षित तूने यह प्रश्न अपने लिए नहीं वरन सारे संसार के कल्याण के लिए पूछा है इस संसार में आज तक जो भी आया है इन्हीं 7 दिनों के अंदर और इन्हीं 7 दिनों के अंदर ही चला जाएगा कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने बताया हम अभी तक संसार में यह सीखे हैं यह मेरा है यह उसका है यह कपड़े यह स्कूटर कार यह घर आदि आदि मेरा है और ये सामान उसका है इसलिए हमें ऐसे ही सपने आते हैं अब हमे इसी जीवन में यदि अपना कल्याण करना है तो श्री कृष्ण और श्री कृष्ण के प्यारो की कथाएं एवं चरित्र सुने और श्रवण भक्ति में केवल भक्ति ही हो जैसे शहद में चीनी नहीं मिलानी पड़ती ऐसे भागवत कथा में कोई और मिलावट न हो बार-बार कथा सुने और फिर रो रोकर प्रभु से प्रार्थना करें कि राधा कृष्ण भगवान हमें आपके दर्शन कब होंगे कीर्तन करें कीर्तन मतलब प्रभु की कीर्ति करना और प्रभु के एवं संतों के भजन गाना पर यह संसार को रिझाने के लिए नहीं वरन भगवान को रिझाने के लिए होना चाहिए और एकादशी निष्ठा और तुलसी सेवा करते हुए जिन सद्गुरु या संतों की कथा या कीर्तन हमें अच्छा लगता है उनसे दीक्षा लेकर अपने नौकरी व्यापार एवं गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए यदि इन तीन नियमों का पालन कर ले तो निश्चित ही हमें इसी जीवन में इसी शरीर में प्रभु की प्राप्ति हो जाएगी
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