नौकरी व्यापार एवं ग्रहस्थ धर्म के पालन करते हुए या सन्यासी रहते हुए किन्हीं भी गुरु जी से दीक्षा लेकर भजन करने पर ही प्रभु के धाम की प्राप्ति होती है/संत गौर दास
लुधियाना/दलजीत अजनोहा
श्री सिद्ध पीठ मंदिर में पंडित राजकुमार शर्मा जी की अध्यक्षता में शाम 6:00 बजे से चल रही श्री भक्तमाल कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौरदास जी महाराज ने आज बताया ब्रह्म जी, नारद जी शिवजी सनकादिक कपिल देव जी मनु जी प्रहलाद जी जनक जी भीष्म
पितामह राजा बलि शुकदेव जी और धर्मराज जी यह द्वादश भक्त है प्रति दिन इनका नाम लेकर प्रणाम करने से इनकी कृपा से ही गुरुजी प्राप्त होते हैं और इन सब की कृपा से भगवत भक्ति व नाम भक्ति प्राप्त होती है और भगवान की प्रथम संतान व प्रथम भक्त श्री ब्रह्मा जी है आगे महाराज श्री ने बताया चाहे ब्रह्म जी या इंद्र भी हो तो भी नौकरी व्यापार एवं ग्रहस्थ धर्म के पालन करते हुए या सन्यासी रहते हुए किन्हीं भी गुरु जी से दीक्षा लेकर भजन करने पर ही प्रभु के धाम की प्राप्ति होती है कलयुग में भी भजन करने पर प्रभु के धाम की प्राप्ति होती है और सतयुग में भी जो भजन नहीं करता उसकी दुर्गति ही होती है
कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने बताया कि किसी व्यक्ति ने जीवन में कैसे भी कर्म किए हो मरते समय उनके मुख पर भगवान का नाम आ जाता है या कोई भगवान का नाम उनको सुना देता है या कोई संत आ जाते हैं या उनकी जलती चिता को भी कोई श्रेष्ठ संत या गुरु देख लेते हैं तो उनको भी प्रभु के धाम की प्राप्ति हो जाती है श्री सिद्ध पीठ मंदिर में पंडित राजकुमार शर्मा जी की अध्यक्षता में शाम 6:00 बजे से चल रही श्री भक्तमाल कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौरदास जी महाराज ने आज बताया ब्रह्म जी, नारद जी शिवजी सनकादिक कपिल देव जी मनु जी प्रहलाद जी जनक जी भीष्म पितामह राजा बलि शुकदेव जी और धर्मराज जी यह द्वादश भक्त है प्रति दिन इनका नाम लेकर प्रणाम करने से इनकी कृपा से ही गुरुजी प्राप्त होते हैं और इन सब की कृपा से भगवत भक्ति व नाम भक्ति प्राप्त होती है और भगवान की प्रथम संतान व प्रथम भक्त श्री ब्रह्मा जी हैआगे महाराज श्री ने बताया चाहे ब्रह्म जी या इंद्र भी हो तो भी नौकरी व्यापार एवं ग्रहस्थ धर्म के पालन करते हुए या सन्यासी रहते हुए किन्हीं भी गुरु जी से दीक्षा लेकर भजन करने पर ही प्रभु के धाम की प्राप्ति होती है कलयुग में भी भजन करने पर प्रभु के धाम की प्राप्ति होती है और सतयुग में भी जो भजन नहीं करता उसकी दुर्गति ही होती हैकथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने बताया कि किसी व्यक्ति ने जीवन में कैसे भी कर्म किए हो मरते समय उनके मुख पर भगवान का नाम आ जाता है या कोई भगवान का नाम उनको सुना देता है या कोई संत आ जाते हैं या उनकी जलती चिता को भी कोई श्रेष्ठ संत या गुरु देख लेते हैं तो उनको भी प्रभु के धाम की प्राप्ति हो जाती है
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