होशियारपुर/दलजीत अजनोहा
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री प्राणेश्वर महादेव मंदिर की ओर से सात दिवसीय श्री राम कथामृत का आयोजन गांव बिंजों नजदीक गवर्नमेंट हाई स्कूल के प्रांगण में श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में किया गया। कथा के पंचम दिवस में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री मनस्विनी भारती जी ने प्रभु श्री राम की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक व्याख्यान किया।
कथा के पंचम दिवस में प्रभु श्री राम के वनवास प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक वर्णन किया गया। साध्वी जी ने बताया कि प्रभु श्री राम ने पिता की आज्ञा एवं सत्य की मर्यादा की रक्षा के लिए राजमहल के समस्त सुखों का त्याग कर चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार किया। उनके इस आदर्श जीवन प्रसंग से हमें कर्तव्य, त्याग, आज्ञापालन एवं धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा मिलती है।
कथा के दौरान माता सीता एवं लक्ष्मण जी के साथ प्रभु श्री राम के वन गमन का वर्णन सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं। प्रभु श्री राम का त्याग और मर्यादा के प्रति उनका अटूट समर्पण सुनकर पूरा पंडाल भक्ति एवं भावनाओं से सराबोर हो गया।
इसके पश्चात केवट प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। साध्वी जी ने बताया कि किस प्रकार निषादराज केवट ने प्रभु श्री राम के चरणों के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा एवं भक्ति का परिचय दिया। केवट और प्रभु श्री राम के बीच का यह प्रसंग सच्ची भक्ति, विनम्रता एवं प्रेम का अनुपम उदाहरण है। इस मार्मिक प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से भाव-विभोर कर दिया।
साध्वी जी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से समझाया कि प्रभु की सच्ची भक्ति में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। प्रभु अपने भक्त के प्रेम और निष्काम भाव को ही स्वीकार करते हैं। केवट प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि जब हृदय में सच्ची श्रद्धा और प्रेम हो, तो प्रभु स्वयं अपने भक्त के समीप आ जाते हैं।
कथा के दौरान मंच से प्रस्तुत दिव्य भजनों एवं मधुर भक्तिमयी संगीत ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। श्रद्धालु प्रभु के गुणगान में सराबोर हो गए और पूरा पंडाल “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।
कथा का समापन श्री आरती के साथ हुआ।आरती में सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रभु श्री की पावन आरती में सहभागिता की। मंदिर कमेटी के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक आरती में भाग लिया।
इसके उपरांत संगत की सेवा एवं प्रभु भक्ति के भाव से लंगर-प्रसाद की व्यवस्था की गई, जिसे उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।
इस प्रकार श्री राम कथा के पंचम दिवस पर राम वनवास एवं केवट प्रसंग ने समूचे वातावरण को भक्ति, प्रेम, त्याग एवं भावनाओं से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने प्रभु श्री राम के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, कर्तव्य, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश प्राप्त किया।
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