संत निरंकारी शाखा होशियारपुर को पंजाब सरकार द्वारा रक्तदान के क्षेत्र में अपना विशेष एवं निःस्वार्थ योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया।



होशियारपुर/दलजीत अजनोहा 
मानव कल्याण, समाज सेवा और जनहित के कार्यों में निरंतर योगदान के लिए संत निरंकारी मिशन की होशियारपुर शाखा को पंजाब सरकार की ओर से राज्य स्तरीय एन.जी.ओ. सम्मेलन में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित म्युनिसिपल भवन में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने की।समारोह में संत निरंकारी होशियारपुर शाखा द्वारा लंबे समय से आयोजित रक्तदान शिविरों एवं विभिन्न जनसेवा कार्यों की विशेष सराहना की गई। मानव जीवन की रक्षा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए किए जा रहे इन निस्वार्थ प्रयासों के सम्मानस्वरूप स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मिशन को शील्ड एवं प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर चंडीगढ़ जोन के जोनल इंचार्ज श्री ओ. पी. निरंकारी ने भी सम्मान प्राप्त करते हुए कहा कि संत निरंकारी मिशन मानवता की सेवा को केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग मानता है। उन्होंने कहा कि युगदृष्टा सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी का अमर संदेश “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” आज भी लाखों श्रद्धालुओं को रक्तदान जैसे महान कार्यों के लिए प्रेरित कर रहा है।उन्होंने आगे कहा कि निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में देश-विदेश में निरंकारी मिशन द्वारा नियमित रूप से रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम तथा अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन सेवाओं का मूल उद्देश्य समाज के जरूरतमंद वर्ग तक सहायता पहुंचाना और लोगों में मानवता, करुणा तथा सेवा की भावना को मजबूत करना है।श्री ओ. पी. निरंकारी ने पंजाब सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि मिशन से जुड़े उन सभी स्वयंसेवकों की सामूहिक सेवा-भावना का सम्मान है, जो बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के मानवता की सेवा में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
वर्षों से यह सेवा संत निरंकारी शाखा होशियारपुर में, मुखी श्रीमती सुभद्रा देवी जी की अगुवाई में निरंतर चल रही है।
प्रत्येक वर्ष सेवादल तथा समस्त साध-संगत के महात्मा अपनी स्वेच्छा से, निष्ठा एवं श्रद्धा भाव से, सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के संदेश और प्रेरणा को हृदय में रखते हुए रक्तदान करते हैं और आगे भी इस महान सेवा को निरंतर जारी रखने का संकल्प रखते हैं।

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