यदि गुरु जी कहे नाली साफ करो तो निष्काम भाव से मन से उनकी आज्ञा का पालन करने पर हमें नाली साफ करने में ही प्रभु की प्राप्ति हो जाएगी/संत गौर दास
लुधियाना/दलजीत अजनोहा
श्री सिद्ध पीठ मंदिर में पंडित राजकुमार शर्मा जी की अध्यक्षता में शाम 6:00 बजे से चल रही श्री भक्तमाल कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौर दास जी महाराज ने आज भक्त नारद जी की अद्भुत कथा सुनाते हुए बताया बताया कि भजन में उपासना मनमुखी नहीं होनी चाहिए वरन गुरुमुखी होनी चाहिए अर्थात जैसे हमारे गुरु जी आदेश देवे हमें वैसे ही करना चाहिए गुरुजी कहे माला करो तो माला से हमें प्रभु जी मिलेंगे यदि गुरु जी कहे नाली साफ करो तो निष्काम भाव से मन से उनकी आज्ञा का पालन करने पर हमें नाली साफ करने में ही प्रभु की प्राप्ति हो जाएगी जैसे जिस पत्थर को जितना ज्यादा तराशा जाता है तथा जितनी ज्यादा चोट मारी जाती है उसकी कीमत उतनी ही अधिक बढ़ती जाती है
प्रथम बार नारद जी को ब्रह्मा जी ने जब कहा कि तुम जाकर सृष्टि बढ़ाओ तो नारद जी ने बड़े रुखे भाव से कह दिया में यह काम नहीं करूंगा ब्रह्मा जी नारद जी के गुरु जी भी है और पिताजी भी है गुरु जी की आज्ञा का पालन न करने पर उनको तीन बार अलग-अलग जन्म लेने पड़े और तीसरे जन्म में गुरु जी से क्षमा मांगने पर गुरु कृपा से फिर ब्रह्मा जी ने ही नारद जी को चतुश्लोकी भागवत सुनाईआगे महाराज श्री ने बताया कि राजा दक्ष ने नारद जी को श्राप दिया कि तुम कहीं भी दो घड़ी से ज्यादा नहीं टिक पाओगे तो नारद जी ने श्राप स्वीकार किया फिर भी नारद जी ने 7 दिन की भागवत कथा एक स्थान पर बैठकर सुनी महाराज जी ने बताया यदि हम सच्चे संत से सच्चे भाव से भगवान की कथा या भक्तमाल की कथा सुनते हैं उसने समय तक श्राप भी हम पर असर नहीं करेगा कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी ने बताया गुरुजी से दीक्षा लेने के बाद हम नौकरी व्यापार अथवा ग्रहस्थ धर्म का पालन करते हुए यदि माला आदि को नियम से एवं प्रेम से पूरा कर रहे हैं तो हमें कभी भी निराश होकर यह नहीं सोचना चाहिए कि हमसे तो भक्ति नहीं हो रही हमें भगवान की अनुभूति नहीं हो रही यदि हम एक बार भी भगवान का नाम लेते हैं तो प्रभु उसको भी सुनते हैं और धीरे-धीरे नाम जप करते हुए जब हमारा प्रेम और आतुरता अत्यधिक बढ़ जाएगी तो प्रभु हमें निश्चित ही दर्शन देंगे पूजा करते हुए यदि कुछ सामान कम हो जाए तो चल जाएगा लेकिन प्रेम श्रद्धा और सेवा में कमी नहीं होनी चाहिए
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