माहिलपुर/दलजीत अजनोहा
मानव निर्मित भवन हर सुख ओर दुख का कारण बन सकता है क्योंकि जैसी घर की वास्तु वैसा आपके जीवन का आधार ।भवन की वास्तु मात्र दिशा या पंच तत्वों तक सीमित नहीं है इनके परे भी बहुत कुछ है जैसे आंतरिक दोष या बाहरी वास्तु दोष इन आंतरिक या बाहरी दोषों में द्वार वेध गंभीर दोषों की श्रेणी में आता है ऐसा मानना है अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री का ।भवन निर्माण करते के बाद अगर किसी घर में बांस बलिया स्थायी रूप से स्थापित हो जाए या नहीं हटाई जाए तो वो बांस द्वार वेध का कारक बन कर आपके खुशियों में दीमक की तरह कार्य करने लगेगा ।खासकर अगर ब्रह्म स्थान उतर दिशा ईशान कोण पूर्व दिशा में इस प्रकार का वास्तु दोष है तो उस घर में हर कार्य में किसी न किसी प्रकार का विलंब,मांगलिक कार्य में बाधा,परिवार में कलह क्लेश,रिश्तों में कड़वाहट,तनाव,बीमारी आदि होने की संभावना बनी रहती है ।ऐसे में अगर घर विदिशा मुखी हो वायव्य आग्नेय दूषित हो तो घर में महिला वर्ग का वर्चस्व बढ़ जाता है,या कोई महिला विशेष बीमारी की चपेट में आ सकती है ।इसका एक ही निवारण है कि अकारण बँधी बाँस बलिया तत्काल हटा दे और द्वार वेध के प्रभावी से मुक्ति पाए ।
Comments
Post a Comment