श्री राम कथा के षष्ठम दिवस पर शबरी प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर, भक्ति भाव का दिया संदेश



होशियारपुर/दलजीत अजनोहा 
 दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री प्राणेश्वर महादेव मंदिर की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन गांव बिंजों के निकट स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल के प्रांगण में श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में किया जा रहा है। कथा के षष्ठम दिवस पर श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री मनस्विनी भारती जी ने प्रभु श्री राम की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक व्याख्यान किया।

कथा के षष्ठम दिवस पर शबरी प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक वर्णन किया गया। साध्वी जी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से बताया कि माता शबरी की प्रभु श्री राम के प्रति अटूट श्रद्धा, निःस्वार्थ प्रेम और वर्षों की प्रतीक्षा सच्ची भक्ति का अनुपम उदाहरण है।

साध्वी जी ने बताया कि माता शबरी ने अपने गुरु के वचनों पर पूर्ण विश्वास रखते हुए जीवन भर प्रभु श्री राम के आगमन की प्रतीक्षा की। उनका प्रत्येक दिन प्रभु के स्वागत की तैयारी और उनके स्मरण में व्यतीत होता था। अंततः जब प्रभु श्री राम उनकी कुटिया में पधारे, तो शबरी का जीवन धन्य हो गया। इस पावन प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि सच्चे हृदय, निष्कपट प्रेम और दृढ़ विश्वास के साथ की गई भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती।

उन्होंने बताया कि प्रभु बाहरी आडंबरों को नहीं, बल्कि भक्त के हृदय में बसे प्रेम और समर्पण को स्वीकार करते हैं। शबरी प्रसंग हमें सिखाता है कि प्रभु की प्राप्ति के लिए सच्चा प्रेम, श्रद्धा, समर्पण और निर्मल भक्ति भाव आवश्यक है।

साध्वी जी के भावपूर्ण प्रवचनों एवं प्रभु की इस दिव्य लीला का वर्णन सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। अनेक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर प्रभु के प्रति अपनी अटूट आस्था एवं प्रेम की अनुभूति करते दिखाई दिए।

कथा के दौरान मंच से प्रस्तुत दिव्य भजनों एवं मधुर भक्तिमयी संगीत ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। प्रभु के पावन गुणगान को सुनकर श्रद्धालु आनंदमग्न हो गए और पूरा पंडाल “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।

कथा के समापन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रभु श्री की पावन आरती में श्रद्धापूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

इसके उपरांत संगत की सेवा एवं प्रभु भक्ति के भाव से लंगर-प्रसाद की व्यवस्था की गई, जिसे उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।

इस प्रकार श्री राम कथा के षष्ठम दिवस पर शबरी प्रसंग ने समूचे वातावरण को प्रेम, श्रद्धा एवं भक्ति के दिव्य रंग में रंग दिया। श्रद्धालुओं ने इस पावन प्रसंग के माध्यम से यह प्रेरणा प्राप्त की कि सच्ची भक्ति बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, निःस्वार्थ प्रेम और पूर्ण समर्पण में निहित है।

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