पेपर लीक, जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर उठते गंभीर सवालभर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और व्यापक शिक्षा सुधार की मांग हुई तेज



चंडीगढ़/दलजीत अजनोहा 
। देशभर में लगातार सामने आ रहे भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों के विरोध में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है। यह आंदोलन अब केवल परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग का प्रतीक बन गया है। लाखों छात्र-छात्राओं का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने उनके भविष्य, मेहनत और विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है।

कानूनी विशेषज्ञ एवं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय जैन का मानना है कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात है जो वर्षों की मेहनत और अपने परिवारों के त्याग के बल पर सरकारी नौकरियों का सपना देखते हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हजारों छात्र बेहतर कोचिंग और शिक्षा के लिए दिल्ली, कोटा, हैदराबाद जैसे शहरों का रुख करते हैं। इन छात्रों के परिवार भारी आर्थिक बोझ उठाकर उन्हें पढ़ाते हैं। दिल्ली के मुखर्जी नगर और राजेंद्र नगर जैसे कोचिंग केंद्रों में रहने वाले छात्रों की कठिन परिस्थितियां किसी से छिपी नहीं हैं। कई बार बाढ़, आगजनी जैसी घटनाओं में छात्रों की जान भी गई है, जबकि लगातार परीक्षाएं रद्द होने और पेपर लीक की घटनाओं के कारण अनेक छात्र मानसिक तनाव और अवसाद का शिकार हो रहे हैं।

हाल के छात्र आंदोलन के दौरान जिम्मेदारी तय करने की मांग उठी, जिसके बाद संबंधित केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया। हालांकि अजय जैन का कहना है कि केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता पूरी व्यवस्था में सुधार की है।

उन्होंने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उन्नत एन्क्रिप्शन, ब्लॉकचेन और आधुनिक डिजिटल सुरक्षा तकनीकों के दौर में भारत के पास सुरक्षित एवं पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विकसित करने की पूरी क्षमता है। कमी तकनीक की नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक जवाबदेही और प्रभावी क्रियान्वयन की है।

लेख में शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती फीस ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आम परिवारों की पहुंच से दूर कर दिया है। आज शिक्षा का बड़ा हिस्सा महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भर होता जा रहा है, जबकि विद्यालयों की भूमिका लगातार कमजोर पड़ रही है।

अजय जैन का मानना है कि जंतर-मंतर का आंदोलन केवल पेपर लीक के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग का संदेश है। उन्होंने सरकार से भर्ती परीक्षाओं को अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित बनाने, सरकारी शिक्षा को मजबूत करने, निजी शिक्षण संस्थानों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने तथा योग्यता आधारित चयन प्रणाली को सुदृढ़ करने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि "शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। जब तक शिक्षा को सेवा और सार्वजनिक विश्वास का विषय नहीं माना जाएगा, तब तक केवल जांच, कार्रवाई या इस्तीफे युवाओं का विश्वास बहाल नहीं कर पाएंगे।"

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