हुशियारपुर/दलजीत अजनोहा
थाना टांडा के डीएसपी सरदार दविंदर सिंह बाजवा और भाई बरिंदर सिंह मसीती ने लोगों से आग्रह किया कि जीवन रहते अधिक से अधिक खून दान करना चाहिए और साथ ही मृत्यु के बाद नेत्र दान के बारे में भी जनजागरण बढ़ाना चाहिए। डीएसपी टांडा दविंदर सिंह बाजवा ने अब तक 65 बार खून दान किया है और भाई बरिंदर सिंह मसीती ने 65 वर्ष की आयु तक अब तक 13 बार खून दान किया है। मानवता और भलाई के लिए वे उन जरूरतमंदों की मदद करते रहे हैं जिन्हें आज भी खून की आवश्यकता पड़ती है—दुर्घटना के मामलों में, बच्चों के जन्म के समय, या किसी बीमारी की वजह से जब रक्त कम हो जाए तो उसे पूरा करने के लिए खून दान की ज़रूरत होती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी मुल्क से खून नहीं बनाया जा सकता और ना ही किसी मुल्क ने आज तक कोई नेत्र या अंग बना पाए हैं; हम अक्सर मौत के बाद अंगों को नष्ट कर देते हैं। यदि वे अंग दान किए जाते और जरूरतमंदों तक पहुँचते तो नेत्रहीन लोगों को रोशनी मिल सकती थी। डीएसपी टांडा ने कहा, "जीवन झूठ है मृत्यु सच्चाई है "—इसलिए हमें अपनी मृत्य के बाद अपनी आंखें और शरीर दान करना चाहिए ताकि वे जरूरतमंदों के काम आ सकें।
इस अवसर पर राज्य अवार्ड प्राप्त करने वाली पंजाब के जिला हुशियारपुर नेत्र दान संस्था की ओर से और टांडा से आई-डोनर इंचार्ज भाई बरिंदर सिंह मसीती ने उन लोगों का धन्यवाद किया जो मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करा रहे हैं और जिनके द्वारा जीवित रहते भी खून दान किया जा रहा है। डीएसपी टांडा ने अपने कर्मियों से भी अधिक से अधिक खून दान करने की अपील की। डीएसपी टांडा के कार्यालय में ऐसे भी व्यक्ति मिले जिन्होंने 50 बार से अधिक भी खून दान किया है, और यह प्रशंसनीय कार्य टांडा पुलिस की ओर से किया जा रहा है जहाँ आज पंजाब पुलिस लोगों की सेवा में कार्यरत है।
डीएसपी टांडा ने कहा कि जब तक डॉक्टर उनसे खून लेने की अनुमति देंगे वे खून दान करते रहेंगे। एक पुलिस अफसर द्वारा अपनी ड्यूटी के दौरान यह सेवा करना वास्तव में प्रशंसनीय कार्य है। समाजसेवियों और नेत्रदान संस्थाओं की ओर से उनके नेक काम के लिए उनका धन्यवाद किया गया। डीएसपी टांडा, उनके समस्त स्टाफ और समाजसेवी भाई बरिंदर सिंह मसीती का भी धन्यवाद, जो रोज़ाना साइकिल से 30 किलोमीटर की दूरी तय करके लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
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