होशियारपुर/दलजीत अजनोहा
हम जिस आवास में निवास करते हैं वहां की ऊर्जा हमारे दिलो दिमाग़ को प्रभावित करती हैं और उसी ऊर्जा के प्रभाव व्यक्ति के आचरण बोल चाल की भाषा हाव भाव चाल चलन ओर खानपान पर स्पष्ट नज़र आने लगता है। ऐसा मानना है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवम लेखक डॉ भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का।
हम जिस आवास में निवास करते हैं उस आवास की दसों दिशाएं ओर प्रत्येक इकाई का अपना अपना महत्व होता है सोचने की क्षमता ओर बुद्धि का संबंध ईशान कोण से होता है अगर ईशान कोण में किसी भी प्रकार का गंभीर वास्तु दोष होता है तो व्यक्ति विवेकहीन होने लगता है और उसकी बुद्धि सही दिशा में काम नहीं करती ओर व्यक्ति नशे की ओर अपने आप को आकर्षित करता है, ईशान कोण के साथ नेरित्य भी दूषित है तो वहां पर नशा सर चढ़ कर बोलने लग जाता है। इन दोनो कोणों के साथ अगर वायव्य एवम आग्नेय कोण भी दूषित है तो जीवन शैली में एनेको अवगुण समाहित होने लग जाते है । अगर ऐसी स्थिति बन जाती है तो सर्व प्रथम अपने भवन के ईशान कोण को नीचा ढलान युक्त साफ सुथरा करे उसके साथ नेरित्य को भारी और ऊंचा करें !ये उपाय नशे की लत से मुक्ती दिलाने में मददगार साबित होंगे। आग्नेय कोण ओर वायव्य दोष मुक्त होते ही जीवन शैली से नशा नदारद मिलेगा।खासकर भवन के नेरीत्य कोण को ऊँचा बंद और भारी रख कर नशे की आदत को समाप्त कर सकते हैं ।
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