होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा
भारत विकास परिषद होशियारपुर की और से प्रधान एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा के नेतृत्व में विशेष बैठक का आयोजन किया गया जिस में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को सरकारी कार्यालयों में आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर संजीव अरोड़ा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनो को सम्मान देना केवल हमारी सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य भी है। जिन्होंने अपनी पूरी उम्र समाज और देश की सेवा में बिताई, आज जब उन्हें किसी सरकारी कार्यालय में अपने जरूरी कार्यों के लिए जाना पड़ता है, तो उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति चिंता का विषय है और इसमें सुधार की तत्काल आवश्यकता है।अक्सर देखने में आता है कि सरकारी दफ्तरों में जब कोई बुजुर्ग व्यक्ति या दिव्यांगजन अपने काम के लिए पहुंचता है, तो उन्हें लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है, एक काउंटर से दूसरे काउंटर भेजा जाता है, दस्तावेजों के नाम पर बार-बार चक्कर लगवाए जाते हैं और अधिकारियों से मिलने के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे हालात में सामान्य व्यक्ति भी परेशान हो जाता है, तो फिर बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
और श्री अरोड़ा ने कहा कि कई वरिष्ठ नागरिक ऐसे होते हैं जो चलने-फिरने में असमर्थ होते हैं, उन्हें घुटनों, कमर या सांस संबंधी परेशानियां होती हैं। वहीं दिव्यांग व्यक्तियों को शारीरिक रूप से कार्यालय तक पहुंचने, सीढ़ियां चढ़ने, लाइन में खड़े होने और इधर-उधर जाने में बहुत मुश्किल होती है। इसके बावजूद कई दफ्तरों में उनके लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं होती, जो बेहद दुखद है।सरकार को चाहिए कि सभी सरकारी कार्यालयों, तहसीलों, नगर निगमों, बिजली बोर्ड, जल विभाग, बैंक, पेंशन कार्यालय और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग से प्राथमिकता काउंटर बनाए जाएं। उनके लिए अलग लाइन की व्यवस्था हो ताकि उन्हें घंटों इंतजार न करना पड़े और उनका कार्य जल्दी पूरा हो सके। कई कार्यालयों में अलग लाइन की सुविधा तो है लेकिन उस पर अमल नहीं किया जाता।इसके साथ-साथ कार्यालयों में बैठने के लिए उचित स्थान, छाया, पंखे, पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिएं। जिन कार्यालयों में अधिक भीड़ रहती है, वहां व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था भी होनी चाहिए।कई बार देखने में आता है कि किसी अधिकारी से मिलने के लिए 2-2 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है । यह स्थिति बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। सरकार को निर्देश जारी करने चाहिए कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर हो और उन्हें अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
इस अवसर पर विजय अरोड़ा व प्रिं.अश्वनी कुमार दत्ता ने कहा कि कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों और सेवादारों को भी संवेदनशील बनाया जाना चाहिए। उन्हें यह समझाया जाए कि जो व्यक्ति बड़ी मुश्किल से चलकर दफ्तर तक पहुंचा है, उसकी मदद करना उनका कर्तव्य है। ऐसे लोगों को इधर-उधर भटकाने के बजाय सीधे सही काउंटर तक पहुंचाया जाए और जरूरी कार्य जल्द निपटाया जाए।
इस मौके प्रिं. डी. के. शर्मा व मदन लाल महाजन ने कहा कि सरकार को एक शिकायत व्यवस्था भी शुरू करनी चाहिए, जहां यदि किसी वरिष्ठ नागरिक या दिव्यांगजन को किसी कार्यालय में परेशान किया जाए, उनसे दुर्व्यवहार किया जाए या अनावश्यक देरी की जाए, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। इससे कर्मचारियों में जवाबदेही आएगी और व्यवस्था में सुधार होगा।
इस अवसर पर सचिव रजिंद्र मोदगिल व तरसेम मोदगिल ने कहा कि हमारी सभ्यता और संस्कार इसी बात से पहचाने जाते हैं कि हम अपने बुजुर्गों, कमजोर और जरूरतमंद लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यदि किसी देश को आगे बढ़ना है, तो उसे अपने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को सम्मान, सुरक्षा और सुविधा देनी होगी और उन्होंने कहा कि प्रत्येक सरकारी कार्यालय में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए प्राथमिकता सुविधा सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें अपने ही अधिकारों के लिए अपमान और परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार और प्रशासन को इस विषय पर तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि समाज के इन सम्माननीय वर्गों को राहत मिल सके। इस अवसर विजय अरोड़ा,रजिंद्र मोदगिल, मदन लाल महाजन, अश्वनी कुमार दत्ता, प्रिं. डी. के. शर्मा, एन. के. गुप्ता, तरसेम मोदगिल, वरिंदरजीत सिंह, विनोद पसान, रविंद्र भाटिया व अन्य उपस्थित थे।
Comments
Post a Comment