शहरों को स्वच्छ सुन्दर और बीमारियों से मुक्त रखने में सफाई सेवकों का बड़ा योगदान, जल्द मांगे माने सरकार : संजीव अरोड़ा
होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा
पंजाब के विभिन्न नगर काउंसिलों एवं नगर निगमों में कार्यरत सफाई सेवकों की लगातार चल रही हड़ताल को लेकर भारत विकास परिषद के प्रधान एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए पंजाब सरकार से अपील की कि सफाई कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को तुरंत स्वीकार कर इस हड़ताल का जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि शहरों में बिगड़ती सफाई व्यवस्था को सुधारा जा सके और आम जनता को राहत मिल सके।
संजीव अरोड़ा ने कहा कि सफाई सेवक किसी भी शहर की रीढ़ की हड्डी होते हैं। शहर को स्वच्छ, सुंदर और बीमारियों से मुक्त रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान होता है। सुबह से लेकर देर शाम तक कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले ये कर्मचारी हर मौसम में अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वह सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं जिनके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आज जब सफाई सेवकों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल का रास्ता अपनाया है, तब सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझना चाहिए और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तुरंत बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।उन्होंने कहा कि हड़ताल के चलते शहरों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे वातावरण दूषित हो रहा है। बाजारों, गलियों और रिहायशी इलाकों में गंदगी बढ़ती जा रही है और आने वाले दिनों में यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी के मौसम में गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया, फूड प्वाइजनिंग तथा अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर हल करे।
और श्री अरोड़ा ने कहा कि बड़ी संख्या में निगम कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से अधिक अस्थाई तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक लगातार सेवाएं देने के बावजूद कर्मचारियों को स्थायी नौकरी का अधिकार न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि ऐसे सभी कर्मचारियों को तुरंत पक्का किया जाए ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके और उन्हें मानसिक शांति मिल सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सफाई कर्मचारियों को मात्र 10 हजार से 12 हजार रुपये तक का वेतन दिया जा रहा है, जो आज की बढ़ती महंगाई में परिवार का पालन-पोषण करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इतनी कम तनख्वाह में बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, बिजली-पानी के बिल, दवाइयां और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को समझते हुए उनका वेतन बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) लंबे समय से लंबित पड़ा है, जिसे तुरंत जारी किया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ पे-कमीशन का बकाया भी शीघ्र कर्मचारियों को दिया जाए ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर उनका अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि यही किसी भी मजबूत और जिम्मेदार प्रशासन की पहचान होती है।
संजीव अरोड़ा ने पंजाब सरकार से अपील की कि वह कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ तुरंत बैठक कर सकारात्मक समाधान निकाले और टकराव की स्थिति समाप्त करे। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी संतुष्ट होंगे तो वे और अधिक निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपने कार्य को करेंगे, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।उन्होंने शहरवासियों से भी अपील की कि वे सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को समझें और उनका नैतिक समर्थन करें। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को उन कर्मचारियों के साथ खड़ा होना चाहिए जो दिन-रात मेहनत करके हमारे शहरों को साफ-सुथरा रखते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और सरकार के बीच आपसी समझ और सहयोग से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
अंत में संजीव अरोड़ा ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी स्वच्छता व्यवस्था और मेहनतकश कर्मचारियों के सम्मान से होती है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह सफाई सेवकों की मांगों को जल्द स्वीकार कर हड़ताल समाप्त करवाए, ताकि शहरों की स्वच्छता व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सके और जनता को राहत मिल सके।
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