राष्ट्र की उन्नति केवल भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्कर्ष में निहित: जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद जीराष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है, राष्ट्र एक जीवंत इकाई' है: जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद जी



होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा 

ऋग्वेदिय पूर्वाम्नाय पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने आज 'राष्ट्र उत्कर्ष' विषय पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए सारगर्भित प्रवचन में राष्ट्र की उन्नति, सुरक्षा और गौरव को लेकर एक सुस्पष्ट मार्गदर्शिका प्रस्तुत की।

शंकराचार्य जी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा या सीमाओं का समूह नहीं है। राष्ट्र एक 'जीवंत इकाई' है जिसकी आत्मा उसकी संस्कृति है। उन्होंने कहा कि जब तक राष्ट्र का नागरिक अपनी जड़ों और सनातन मूल्यों से नहीं जुड़ता, तब तक वास्तविक उत्कर्ष संभव नहीं है। महाराज श्री ने वर्तमान शिक्षा पद्धति पर विचार रखते हुए कहा कि ऐसी शिक्षा जो केवल जीविकोपार्जन सिखाती है, वह अधूरी है। राष्ट्र उत्कर्ष के लिए ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो, चरित्र निर्माण करे, स्वधर्म और स्वदेश के प्रति गौरव भाव जगाए, विज्ञान और आध्यात्म का संतुलन बनाए।

       राष्ट्र उत्कर्ष के लिए आर्थिक स्वतंत्रता को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय कौशल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके अनुसार जब भारत अपनी मेधा और संसाधनों का उपयोग स्वयं के उत्थान के लिए करेगा, तभी हम विश्व गुरु के पद पर पुनः प्रतिष्ठित होंगे।

        महाराज श्री ने राष्ट्र की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और शास्त्र सम्मत मर्यादाओं का पालन ही समाज को खंडित होने से बचा सकता है। एकता के अभाव में कोई भी राष्ट्र शक्तिशाली नहीं बन सकता। राष्ट्र का उत्कर्ष तब होता है जब शासक धर्मानुसार शासन करे और प्रजा कर्तव्यपरायण हो। राजनीति जब धर्म से विमुख होती है, तो राष्ट्र का पतन सुनिश्चित है। भारत को पुनः वेदों की ओर लौटना होगा ताकि एक समृद्ध और सुरक्षित भारत का निर्माण कर सकें।

  इस अवसर पर पुरी पीठ परिषद के प्रदेश अध्यक्ष सुशील ठाकुर, संदीप नागौरी, भारत भूषण वर्मा, रमेश भारद्वाज, कमल वर्मा, तिलक राज चौहान, प्रधान राम पाल शर्मा, राहुल पासी, संध्या पासी, डॉ. अवनी,अमिताभ शर्मा, सीमा शर्मा, एडवोकेट नितिश भूषण वर्मा, अर्जुन शर्मा, तनिश चौहान, कृष्ण नागौरी व श्रद्धालु उपस्थित थें।

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