होशियारपुर /दलजीत अज्नोहा
धरती के अंदर पानी सूखता जा रहा है और पर्यावरण ज़हरीला होता जा रहा है, जो कि गहरी चिंता का विषय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक व विनाशकारी खतरा बन सकता है। इसलिए पर्यावरण को साफ और स्वच्छ रखना और धरती को हरी-भरी तथा उपजाऊ बनाए रखना आवश्यक है, और हर व्यक्ति एक पेड़ जरूर लगाए। ये शब्द कहते हुए संत परमजीत दास, गद्दी नशीन डेरा संत मेला राम नगर कोषाध्यक्ष गुरु रविदास साधु संप्रदाय सोसायटी (रजि. पंजाब) ने कहा कि गुरु साहिब की बाणी में भी बताया गया है के हवा हमारे शरीर के लिए वैसी ही है जैसी गुरु जीवों की आत्मा के लिए है, और पानी जो सभी जीवों का पीने का स्रोत है, वह भी स्वयं ईश्वर है। उन्होंने कहा कि धरती, जो जीवों की माता कही जाती है क्योंकि यह सब चीज़ों को अपने गर्भ में रखती है और वहीं से उन्हें उत्पन्न करती है, वह भी परमात्मा ही है क्योंकि सब कुछ परमात्मा ने अपने आप से उत्पन्न किया है। "पहिला पानी जीओ है जत हरिया सभु कोइ" से यही शिक्षा मिलती है कि हवा, पानी और धरती को माता-पिता समान समझकर उनकी रक्षा करनी चाहिए।
संत परमजीत दास ने कहा कि मनुष्य ईर्ष्या, वैर और विरोध के कारण बाहरी तपिश में जलता रहता है, परंतु प्रभु का स्मरण करने से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और प्रवृत्ति शांत तथा ठंडी हो जाती है। इसी तरह धरती माँ की गोद पेड़-पौधों और पानी से हरित बनी रहती है और संसार के प्राणियों को अच्छा, शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक जीवन प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जंगलों की घटती संख्या और निरंतर कटाई के कारण यहां मानवीय जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हुआ है, वहीं कई प्राणियों की नस्लें विलुप्त हो रही हैं; इसलिए अधिक से अधिक पेड़ लगाकर सुंदर संसार तथा प्राकृतिक संसाधनों और जीवों की रक्षा की ओर ध्यान देना चाहिए।
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