गौतम नगर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग संपन्न: समर्थ गुरु रामदास जी और मीराबाई जी के प्रसंगों से जानी गुरु आज्ञा व सेवा की महिमा
माहिलपुर/दलजीत अज्नोहा
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजीजेएस) के स्थानीय गौतम नगर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक सभा में श्रद्धेय *सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी पूनम भारती जी* ने उपस्थित श्रद्धालुओं को 'सेवा और गुरु आज्ञा' के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। साध्वी जी ने सनातन संस्कृति के महान स्तंभों का उदाहरण देते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ गुरु रामदास जी की आज्ञा का पालन कर एक साधारण बालक भी राष्ट्र रक्षक बन गया, वहीं भक्ति शिरोमणि मीराबाई जी ने गुरु रविदास जी के मार्गदर्शन और उनकी आज्ञा को शिरोधार्य कर साक्षात् श्री कृष्ण को पा लिया। गुरु आज्ञा केवल एक निर्देश नहीं, बल्कि शिष्य के भीतर छुपी असीम ऊर्जा और दिव्य चेतना को जाग्रत करने की अचूक विधा है। आध्यात्मिक इतिहास गवाह है कि जब-जब शिष्य ने अपनी बुद्धि को त्यागकर पूर्णतः गुरु के वचनों और नि:स्वार्थ सेवा में खुद को समर्पित किया, तब-तब इतिहास में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं।
आज के इस वैज्ञानिक और आधुनिक युग में मानव मानसिक तनाव, अवसाद और विकारों से ग्रस्त है। समाज में बढ़ती स्वार्थ भावना, नशाखोरी और नैतिक मूल्यों का पतन इस बात का प्रमाण है कि इंसान अपनी आंतरिक शक्ति को भूल चुका है। साध्वी जी ने आधुनिक सामाजिक समस्याओं पर प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मनुष्य पूर्ण गुरु की शरण में जाकर *'ब्रह्म ज्ञान' (Brahm Gyan)* द्वारा अपनी अंतरात्मा को जाग्रत नहीं करता, तब तक बाहरी समाज का सुधार असंभव है। ब्रह्म ज्ञान से जाग्रत होने के बाद ही नि:स्वार्थ सेवा की भावना जन्म लेती है, जो समाज को ड्रग्स, कन्या भ्रूण हत्या और पर्यावरण प्रदूषण जैसी कुरीतियों से मुक्त कराने में सहायक बनती है। संस्थान द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक प्रकल्प इसी आत्म-जागृति का परिणाम हैं। अंत में, उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे गुरु के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।--
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