राज्य राजमार्गों पर ट्रैफिक चिन्हों की जगह शराब के प्रचार-बोर्ड — सड़क सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों तक सीमित सामग्री
होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा—
ट्रैफिक चिन्हों का सड़क पर होना और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वाहनों के चालकों में रोड सेफ्टी के प्रति जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है। परंतु सरकार की अनदेखी के कारण आज राज्य राजमार्गों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए शराब के बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर लगे हुए हैं, जो बच्चों और नौजवानों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं और सड़कों पर हादसों की संख्या बढ़ा रहे हैं।
इस मामले में लेबर पार्टी के अध्यक्ष जय गोपाल धीमान ने पंजाब सरकार की गलतियों और ट्रैफिक चिन्हों की जगह गैर-संवैधानिक रूप से शराब के बोर्ड लगाने की सख्त निंदा की। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारें संविधान के पालन और डॉ. आंबेडकर के बताए रास्तों पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित करती हैं, और दूसरी तरफ वही सरकारें संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ सक्रियता को बढ़ावा दे रही हैं।
धीमान ने बताया कि शराब के प्रचार वाले फ्लैक्स के पास सड़कों किनारे खाली शराब की बोतलों के ढेर आम तौर पर देखे जा सकते हैं। स्कूलों में बच्चों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जबकि सड़कों पर ट्रैफिक चिन्ह दिखाई ही नहीं देते। जबकि ट्रैफिक चिन्हों का महत्त्व शराब के बैनरों से कहीं अधिक है। धीमान ने कहा कि पंजाब सरकार की घर-घर शराब पहुँचाने जैसी नीतियाँ ट्रैफिक चिन्हों की उपेक्षा करवा कर पंजाब को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचा रही हैं।
धीमान ने पूछा कि ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने और रोड सेफ्टी के कागज़ी दावों का क्या लाभ जब सड़कों पर ट्रैफिक चिन्ह ही नहीं लगाये जा रहे? हर साल रोड सेफ्टी के लिये खर्च किए जाने वाले लाखों रुपये का क्या मतलब रह जाता है यदि चार दिन के कार्यक्रमों के बाद भी ट्रैफिक चिन्ह नहीं लगाए जाते। उन्होंने कहा कि हादसे कम करने के लिए एक अच्छी प्रक्रिया यह है कि सड़कों पर हर जगह ट्रैफिक चिन्ह लगाए जाएँ ताकि लोगों को नियमों का पता चल सके।
धीमान ने कहा कि जबकि हम विश्व में अपनी योग्यता और रंगीन पंजाब की बातें करते हैं, तब भी हम राज्य राजमार्गों तक ही सड़क सुरक्षा सीमित रखकर बाकी ग्रामीण सड़कों तक पहुँचने में वर्षों लगने की बात कर रहे हैं। जिन विभागों ने ट्रैफिक चिन्हों में गड़बड़ी की है, उनसे ट्रैफिक ढाँचे में सुधार की क्या उम्मीद रखी जा सकती है?
धीमान ने यह भी कहा कि यह बहुत दुखद है कि यदि रिजनल ट्रांसपोर्ट अधिकारी खुद ही ऐसी गलतियाँ कर रहे हैं तो ट्रैफिक व्यवस्था कौन ठीक करेगा। सड़कों पर होने वाले हादसों से देश को जो अपरिवर्तनीय क्षति होती है, उसके लिए सरकारें ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसपोर्ट विभाग में भ्रष्टाचार फैल गया है और यह लोगों की जानों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जहां कहीं ट्रैफिक चिन्ह लगे हैं, वे या तो खंपियों में फंसे हुए हैं या टूटे पड़े हैं।
धीमान ने यह भी हैरानी व्यक्त की कि पंजाब में राजनीतिक विरोधी तबके के नेता भी मुँह बंद करके बैठे हुए हैं, और खासकर सरकार से जुड़े नेता अपनी ही सरकार की नीतियों को लागू करने हेतु चुप क्यों हैं। धीमान ने पांच सदस्यीय मानव अधिकार आयोग को भी ईमेल भेज कर हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए आगे आएँ।
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