नेरीत्य ओर वायव्य के वास्तु दोष विवाह में विलम्ब करवाते है-डॉ भूपेंद्र वास्तुशास्त्री

 
माहिलपुर/दलजीत अज्नोहा 
         मानव जीवन में घटित होने वाली हर घटना का सम्बंध कही न कही हमारे भवन की वास्तु से जुड़ा हुआ होता है चाहे वह घटना शारीरिक हो मानसिक हो आर्थिक हो या फिर सामाजिक हो या वैवाहिक जीवन से जुड़ी हो ।ऐसा मानना है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवम् लेखक डॉ भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का। घर,परिवार में लड़के, लड़कियां विवाह योग्य होने के बावजूद भी विवाह में विलम्ब आता है अकारण देरी हो जाती है , रिश्ते ही नहीं आते हैं ,विवाह की बात आगे नहीं बढ़ती है ,कभी कभी तो लड़के लड़किया ख़ुद ही शादी से मना कर देते हैं या सगाई होते हैं तुरंत संबंध विच्छेद हो जाते हैं तो इन सब के पिछे भवन के नेरित्य कोण एवं वायव्य कोण के वास्तु दोषों का प्रभाव होता है । नेरित्य दूषित हो निम्न प्रकार से हो सकता है भूमि गत जल स्त्रोत का होना, निर्माण रहित होना, खड्डा होना, सम्पूर्ण घर की जल निकासी का होना, मुख्य द्वार का होना, रसोई घर का होना, कुंआ, बोरवेल होना , नेरित्य अन्य दिशाओं से नीचा होना आदि में से कोई भी दोष है तो विवाह में विलम्ब या वैवाहिक जीवन में बाधा उत्पन्न करेगा। नेरित्य कोण के साथ ही वायव्य कोण में वास्तु दोष है तो महिला वर्ग का घर की कन्याओं को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। नेरित्य कोण ओर वायव्य कोण के साथ आग्नेय कोण में भी दोष हो गया तो वैवाहिक जीवन में जहर घुलता ही जायेगा, विवाह योग्य युवक युवतियों को वैवाहिक जीवन से वंचित भी रहना पड़ सकता है। अपने भवन की वास्तु सुधार कर सामाजिक, वैवाहिक जीवन में मधुरता ला सकते हैं।विवाह योग्य लड़के का शयन कक्ष नेरीत्य कोण में ओर कन्या का शयन कक्ष वायव्य में बना कर शादी में आ रही बाधाओ को कम किया जा सकता है ।

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