यथा नाम तथा गुण—इस कहावत को चरितार्थ किया। हमारी संस्कृति में नामकरण संस्कार की बड़ी महिमा है


होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा 


दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रोशन ग्राउंड, होशियारपुर में 14 अप्रैल से 20 अप्रैल सायं 7 बजे से 10 बजे तक चल रही श्रीमद् भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन के प्रसंग में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या विश्व विख्यात भागवत भास्कर साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने बहुत ही सुसज्जित ढंग से भगवान श्रीकृष्ण जी के अलौकिक एवं महान व्यक्तित्व के पहलुओं से अवगत करवाया।

परीक्षित का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि माँ के गर्भ में जिसने रक्षा की, उस भगवान की खोज में जीवन लगा दिया। यथा नाम तथा गुण—इस कहावत को चरितार्थ किया। हमारी संस्कृति में नामकरण संस्कार की बड़ी महिमा है।

आज संस्कार-विहीनता के वातावरण में पल रही युवा पीढ़ी की यही दशा है। जिस प्रकार मिठाई से मिठास, ईखदण्ड से रस, दूध से घी निकाल लेने से ये निःसार, तेजहीन हो जाते हैं, वैसे ही मानव के जीवन से संस्कार न हों तो वह तेजहीन हो जाता है।

इन संस्कारों के अभाव में युवा वर्ग पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहा है। भारतीय परंपराओं का उपहास करना और उन्नति के नाम पर नैतिकता का परित्याग करना उनके जीवन की उपलब्धि बन गई है। फिल्मी सितारों, मॉडल आदि को उन्होंने जीवन का आदर्श बनाया है। इनमें से किसी का परिधान उन्हें भाता है तो किसी की चाल-ढाल।

स्मरण रहे, युवाओं द्वारा चुने गए इन आदर्शों ने व्यक्तिगत कितनी भी प्राप्तियाँ कर ली हों, पर उनके त्याग, सेवा और परोपकार के कोई बड़े आदर्श स्थापित नहीं किए। उनकी नकल करने से हमारे परिधान और चाल-ढाल में परिवर्तन अवश्य आ सकता है, किन्तु बाहरी चमक-दमक से बात नहीं बनती। इससे चिंतन बदल सकता है, चरित्र नहीं।

संस्कारों की आवश्यकता है, जो विश्व रूपी बगिया को सरल, सुंदर और सुगंधित बना सकें। क्योंकि जहाँ संस्कार हैं, वहीं उच्च, श्रेष्ठ समाज की परिकल्पना साकार होती है।

उन्होंने कहा कि अध्यात्म हमारी भारतीय संस्कृति का आधार है, जिसके कारण हमारे देश का आज तक अस्तित्व है। लोहे और चुम्बक में अंतर मात्र यही है कि चुम्बक के समस्त अणु एक स्थान पर एकत्रित होते हैं, जबकि लोहे में वे बिखरे हुए रहते हैं।

जब मानव अपने मूल से परिचित होता है और उसके भीतर संतुलन पैदा होता है, तब एकाग्रता का पदार्पण होता है। हमारा मूल अध्यात्म है, जिसे जानने के बाद विवेकानंद जी ने भारतीय अस्मिता एवं गरिमा को विदेशों में स्थापित किया था।

अरविंद जी, सुभाष चंद्र बोस, स्वामी रामतीर्थ जी देशभक्ति की भावना से तभी परिचित हो पाए, जब उन्होंने अपने मूल को जाना।
कथा की शुरुआत मुख्य यजमान मनीष गुप्ता ( बिल्ला ब्रिक्स), कुशा गुप्ता,राहुल गुप्ता ,ओर दैनिक यजमान गोविंद सिंह ठाकुर,अंजली ठाकुर,वीर बहादुर सिंह,प्रभजोत ठाकुर,कोमल ठाकुर,यशपाल गुप्ता,मीनू गुप्ता,सुदेश गुप्ता ने भागवत पूजन कर की।
कथा में विशेष रूप में श्री तीक्ष्ण सूद जी( पूर्व कैबिनेट मंत्री),वरिंदर रत्ती कानूनगो ,कमलजीत सेतिया ( प्रधान अरोड़ा महासभा),दीपक मेंहदीरत्ता ,सुषमा सेतिया( पूर्व पार्षद), डा.विजय धीर( वाइस चांसलर संत बाबा भाग सिंह यूनिवर्सिटी)भारत भूषण वर्मा,अश्वनी छोटा ( प्रधान युवा वाहिनी समिति)इला गुप्ता( प्रधान अंबे वैली),हरीश खोसला ( प्रधान शिवरात्रि उत्सव कमेटी ),रजनीश जोशी( प्रधान ठाकुर द्वारा बाबा धन्ना राम)ज्योति खोसला,यशपाल शर्मा, दिनेश कौशल,लोकेश चौबे,सुशीला देवी, हरभजन पाल ( प्रधान श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर),रविंदर अग्रवाल ( सेक्रेटरी शिव मंदिर जगतपुरा),स्मार्ट बीज कंपनी के सदस्य,बलराज सेठी,राजीव दुग्गल,प्रदीप डोगरा ( प्रधान भूतगिरी मंदिर),पंडित शाम लाल,पंकज बेदी, प्रवीण गुप्ता,नीतीश वर्मा,सुबोध अग्रवाल,रेणु,असित चतुर्वेदी,वीणा चतुर्वेदी,दविंदर कुमार,नीलम कुमारी,पंडित अनूप भार्गव शास्त्री,तिलक राज मेहता,रेणु मेहता, शुभलता ( प्रधान साईं मंदिर),रंजीत कुमार यादव,उर्मिला देवी,राम प्रकाश शर्मा,संजीव कुमार,दविंदर कुमार,आशा रानी,सतीश,नीतू सिंह, एच.के नाकड़ा,पप्पू,मानसी टंडन,ज्योति अग्रवाल,तूलिका बसाक,अमनिंदर मिश्रा ,संजीव शर्मा,अनुराग कालिया,मुकेश शर्मा,ओर शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।
अंत में स्वामी सज्जनानंद जी ने सभी शहर वासियों से अपील की है कि कथा अभी 5 दिन ओर चलेगी तो इस कथा में आप सभी सम्मिलित होकर इस कथा की शोभा बढ़ाए

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