प्राण से विहीन शरीर की क्या दशा हो सकती है? जिसकी आत्मा ही निकल जाए, वह कैसे जीवित दिखेगा? वहाँ के प्राण स्वयं श्रीकृष्ण थे, वही आत्मा थे। जब वे मथुरा गए, तो पूरा गाँव शून्य हो गया/साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती
होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रोशन ग्राउंड होशियारपुर में 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक चल रही श्रीमद् भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के छठे दिन में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या विश्व विख्यात भागवत भास्कर साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने
भगवान श्रीकृष्ण जी की मथुरागमन लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कंस के आदेशानुसार अक्रूर जी कन्हैया और दाऊ जी को मथुरा ले जाने के लिए वृंदावन की ओर बढ़ते हैं।
सारे गाँव में यह समाचार जंगल की आग की तरह फैल गया कि कन्हैया हम सबको छोड़कर जा रहे हैं। सभी उनसे मिलने के लिए नंद बाबा के आंगन में एकत्र हो गए। सभी ग्वाल-बाल और गोपियाँ कन्हैया को बहुत भावभीनी विदाई देते हैं। वे गलियाँ, जिनमें कभी जीवन मुस्कुराया करता था, आज उदास थीं। एक अजीब और गहरी पीड़ा से पूरा गाँव व्याकुल था।
प्राण से विहीन शरीर की क्या दशा हो सकती है? जिसकी आत्मा ही निकल जाए, वह कैसे जीवित दिखेगा? वहाँ के प्राण स्वयं श्रीकृष्ण थे, वही आत्मा थे। जब वे मथुरा गए, तो पूरा गाँव शून्य हो गया।
जब अक्रूर जी उन्हें रथ पर बैठाकर मथुरा ले गए, तब प्रभु श्रीकृष्ण धर्म की स्थापना हेतु मथुरा नगरी की ओर प्रस्थान कर गए। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर एक निरंकुश राजा की सत्ता को समाप्त किया।
वर्षों पहले जो आकाशवाणी हुई थी कि देवकी के आठवें गर्भ की संतान कंस का काल होगी, वह आज सत्य सिद्ध हुई। आज सभी ओर एक ही स्वर गूंज रहा था— “सत्यमेव जयते”। एक नृशंस पापी का अंत हुआ और धर्म, न्याय एवं सत्य की स्थापना हुई।
यह उनका शौर्य था कि उन्होंने कंस का वध कर मथुरा का राज्य उग्रसेन को सौंप दिया। भौमासुर के बाद उसके पुत्र भगदत्त को सिंहासन पर बैठाया।
ठीक वैसे ही आज हमारे सैनिक भाई सीमा की रक्षा कर रहे हैं। यह कार्य हिंसा नहीं, बल्कि शौर्य का कार्य है। गीता में कहा गया है कि जो देश के लिए शहीद होगा, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी। देश की रक्षा करना हिंसा नहीं, बल्कि वीरता का प्रतीक है।
श्रीकृष्ण हमें अपने आदर्शों के प्रति संकल्पित रहने की सीख देते हैं, जैसे हमारे देश के क्रांतिकारियों ने किया। भारत की मिट्टी उन शहीदों के रक्त से पवित्र है, जो देश के लिए हँसते-हँसते शहीद हो गए।
मंगल पांडे जैसे अनेक वीरों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, पर अंग्रेज यह नहीं जानते थे कि भारत की धरती पर जितने सिर कुचले जाएंगे, उतने ही और सिर उठ खड़े होंगे।
मंगल पांडे की शहादत ने पूरे उत्तर भारत में क्रांति की ज्वाला को जन्म दिया।
कथा की शुरुआत मुख्य यजमान मनीष गुप्ता ( बिल्ला ब्रिक्स), कुशा गुप्ता,राहुल गुप्ता ,ओर दैनिक यजमान हरीश आनंद, एडवोकेट नरेंद्र शर्मा, रविजेश गोयल,मंगत राम गुप्ता,दीपक गुप्ता जी ने परिवार सहित भागवत पूजन कर की।
कथा में विशेष रूप में डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन,सुंदर शाम अरोड़ा( पूर्व कैबिनेट मंत्री),पवन आदिया( पूर्व विधायक),सचिन आहूजा( म्यूजिक कंपोजर & डायरेक्टर वाइस ऑफ पंजाब), ब्रजेश गुप्ता( विजय ब्राइडल),कमलजीत सेतिया,नरेंद्र कुमार भूपिंदर कुमार,अश्वनी छोटा ओर युवा वाहिनी समिति के सभी सदस्य विवेक महाजन,अजय भारद्वाज, प्रो राजीव, कैप्टेन कुलदीप सिंह, डा. बलवीर सिंह, डा.सविता ओहरी, सरूप कुमार बहल,सरपंच परमजीत सिंह,नरेंद्र,दविंदर कुमार,हरीश जैरथ, हेम लता, प्रिंसिपल डा.विधि भल्ला, डा.राजिंदर गुप्ता, संजीव ओहरी,अश्वनी कालिया,वरिंदर कुमार, डा.राम कृष्ण, डा. संजीव कुमार,पूर्व प्रिंसिपल बलवीर सिंह,मोहन सिंह,दविंदर कुमार, एडवोकेट सिद्धार्थ चौधरी,राकेश कपिला, अमनिंदर मिश्रा,समीर बांसल, डा. विजय इंदर कंवर,पार्षद अशोक कुमार, भारत भूषण वर्मा,पल्लवी शर्मा, डा.रणधीर सिंह,मोहित ओहरी,चंदन,बजरंगी पाण्डेय,विकास सूद,
और शहर की धार्मिक,राजनीतिक, सामाजिक संस्थाओं ओर
शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।
अंत में गोपी चंद कपूर (प्रधान व्यापार मंडल),दीपक मेंहदीरत्ता ( प्रधान बेकरी यूनियन) ने कथा व्यास ओर उनकी टीम को सम्मानित किया।
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