पी.आर.टी.सी. (पुलिस भर्ती प्रशिक्षण केंद्र) जहान खेला (होशियारपुर) में जागरूकता सेमिनार



होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा 

मिशन स्माइल और “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत श्रीमती आशिका जैन, आई.ए.एस., डिप्टी कमिश्नर-कम-चेयरपर्सन जिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास सोसाइटी होशियारपुर के निर्देशानुसार जिला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र होशियारपुर द्वारा पी.आर.टी.सी. (पुलिस भर्ती प्रशिक्षण केंद्र) जहान खेले (होशियारपुर) में कमांडेंट मनदीप सिंह गिल, पी.पी.एस. तथा डॉ. सौरव, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज पी.आर.टी.सी. अस्पताल के नेतृत्व में जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. सौरव, मेडिकल ऑफिसर ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया और युवाओं को नशे जैसी बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है।

इस मौके पर मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज, जिला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र होशियारपुर डॉ. जसलीन कौर विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर डॉ. जसलीन कौर ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग (Substance Abuse) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं में मेहनत करने के प्रति उत्साह बढ़ाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को नशाखोरी के खिलाफ अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पांच नदियों की धरती पंजाब का युवा आज नशों की दलदल की ओर बढ़ रहा है। यदि हम आज से ही जागरूक होंगे, तभी हम अपने पंजाब को फिर से रंगला पंजाब बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि नशा हमारे शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है और इसके प्रभावों के बारे में विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी।

इस मौके पर संदीप कुमारी, साइकोलॉजिस्ट काउंसलर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार नशाखोरी एक मानसिक बीमारी है, जो लंबे समय तक चलने वाली होती है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी व्यक्ति को पहले शारीरिक, फिर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशाखोरी के कारण, दुष्प्रभाव और इससे होने वाली बीमारियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में विद्यार्थियों में किशोरावस्था (टीन एज) में ही इसकी शुरुआत हो रही है।

उन्होंने कहा कि तंबाकू को “अन्य नशों का प्रवेश द्वार” कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू में 4000–7000 रसायन पाए जाते हैं, जिनमें लगभग 25% निकोटिन होता है, जो व्यक्ति में लत (क्रेविंग) और सुखद अनुभूति उत्पन्न करता है। तंबाकू के सेवन से शरीर में लगभग 70 प्रकार के कैंसर होने की संभावना होती है।

इस अवसर पर प्रशांत आद्या, काउंसलर ने नशाखोरी के दुष्प्रभावों और कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, पंजाब सरकार द्वारा जिला होशियारपुर में दो नशा मुक्ति केंद्र (सिविल अस्पताल होशियारपुर और सिविल अस्पताल दसूहा) में मरीजों का 15 से 21 दिनों का डिटॉक्सिफिकेशन किया जाता है। इसके बाद मरीजों को जिला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र, मोहल्ला फतेहगढ़, होशियारपुर में 90 दिनों तक रखा जाता है, जहां उनकी व्यक्तिगत, समूह और पारिवारिक काउंसलिंग के साथ-साथ प्रमाणित व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण भी कराया जाता है।

इसी प्रकार 16 ओ.ओ.ए.टी. क्लीनिक जिला, उपमंडल और सी.एच.सी. स्तर पर संचालित हैं, जहां मरीज और उसके परिवार की लिखित सहमति के आधार पर ऑनलाइन उपचार शुरू किया जाता है, जो लगभग एक वर्ष में पूरा होता है। इस उपचार में दवाइयों से ओवरडोज से मृत्यु नहीं होती। उन्होंने बताया कि जनसामान्य की काउंसलिंग के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “टेली-मानस” ऐप और हेल्पलाइन नंबर 14416 शुरू किया गया है, जिस पर लोग 24x7 कॉल करके परामर्श और आवश्यक सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर तहरीन बसरा, स्टेट मेंटल हेल्थ फेलो ने “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें सूरमा प्रोग्राम, गांवों के पहरेदार प्रोग्राम तथा जनस्तर पर जागरूकता गतिविधियों के बारे में बताया गया। उन्होंने लोगों को गांवों के पहरेदार (वी.डी.सी.) सदस्य बनने के लिए भी प्रेरित किया और पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहिम के बारे में जानकारी दी।

इस मौके पर प्रशांत आद्या, काउंसलर ने विद्यार्थियों को नशामुक्त रहने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि हमें स्वयं जागरूक होने की आवश्यकता है। यदि हम जागरूक होंगे, तभी हम नशाखोरी से ग्रस्त व्यक्तियों की सहायता कर सकेंगे।

Comments