एचपीवी टीकाकरण और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित- अधिकारियों को जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश
होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा
अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर डॉ. निधि कुमुद बंबाह के दिशा-निर्देशों तथा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग के नेतृत्व में चाइल्ड हेल्थ प्रोग्राम संबंधी समीक्षा बैठक डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में आयोजित की गई। इस बैठक में सभी एसएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक), जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी), जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा निजी स्कूलों के विभिन्न अध्यापकों ने भाग लिया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर डॉ. निधि ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन अभियान के लिए सभी एसएमओ अपना-अपना शेड्यूल तैयार करें, जिसमें अपने क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मचारी और आशा वर्करों को शामिल किया जाए। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को भी निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी वर्कर भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें।
उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर केवल महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी प्रभावित करता है। इससे बचाव के लिए 14 वर्ष तक की बच्चियों को यह टीका लगवाना आवश्यक है, जिससे पुरुषों में भी इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है और इस संबंध में किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए। लोगों को मेडिकल स्टाफ द्वारा दी जा रही सही जानकारी पर भरोसा करते हुए 14 वर्ष तक की बच्चियों का जल्द से जल्द टीकाकरण करवाना चाहिए, क्योंकि 28 मई तक ही प्रतिदिन एचपीवी टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद छोटे बच्चों के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की तरह सप्ताह के कुछ दिनों में ही चुनिंदा स्थानों पर यह सुविधा मिलेगी।
अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर बे बताया कि एचपीवी टीकाकरण के लिए माता-पिता या अभिभावक का साथ होना जरूरी है, क्योंकि उनके मोबाइल पर ओटीपी प्राप्त होने के बाद ही टीका लगाया जाता है। यदि किसी के पास मोबाइल उपलब्ध नहीं है तो सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर उसे अपलोड किया जाएगा और टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों तथा निजी स्कूलों के प्रमुखों को निर्देश दिए कि बच्चों के अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए ताकि अधिक से अधिक बच्चियां एचपीवी वैक्सीन लगवा सकें।
इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग ने बताया कि एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित है। जिले में अब तक 665 टीके लगाए जा चुके हैं और किसी भी बच्चे में कोई प्रतिक्रिया या दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है।
टीबी कार्यक्रम संबंधी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जो बच्चे कमजोर हैं या बार-बार खांसी और बुखार के कारण स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं, उनकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाए ताकि समय पर टीबी की जांच और इलाज शुरू किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में नए दाखिला लेने वाले बच्चों के पांच वर्ष तक के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी टीका लंबित न रहे। इससे भारत सरकार के मीजल्स-रूबेला एलिमिनेशन प्रोग्राम-2026 को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों को यह सिखाया जाए कि खांसते या छींकते समय मुंह को रूमाल या कोहनी से ढंकना चाहिए। साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड कार्यक्रम के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को समय पर आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां मिल रही हैं। यदि किसी बच्चे में जन्मजात दोष है तो उसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी जाए ताकि आरबीएसके टीमों द्वारा उसका इलाज करवाया जा सके।
यदि कोई बच्चा उम्र के अनुसार कमजोर या छोटा है तो उसकी जांच नजदीकी आम आदमी क्लीनिक या सरकारी अस्पताल में बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर से करवाई जाए, ताकि कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया जा सके।
आंखों की जांच संबंधी जानकारी देते हुए डॉ. सीमा ने कहा कि सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल यह सुनिश्चित करें कि शिक्षकों द्वारा स्नेलन चार्ट से बच्चों की आंखों की जांच की रिपोर्ट साझा की जाए, ताकि जरूरतमंद बच्चों को सरकार द्वारा शीघ्र चश्मे उपलब्ध करवाए जा सकें।
उन्होंने कहा कि इन सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चे स्वस्थ रहेंगे, बीमारियों से मुक्त होंगे और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देंगे।
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