विश्व जल दिवस पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का विशेष संदेश 'संरक्षण' प्रकल्प के अंतर्गत 'नीर संरक्षण अभियान' के माध्यम से जल बचाने का आह्वान


होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा 

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, गौतम नगर आश्रम, होशियारपुर में 'विश्व जल दिवस 2026' के उपलक्ष्य में संस्थान के प्रकृति संरक्षण कार्यक्रम 'संरक्षण' के अंतर्गत 'नीर संरक्षण अभियान' का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी सज्जनानंद जी ने जल की महत्ता को आध्यात्मिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारे वेदों और शास्त्रों में जल को 'देवता' (वरुण देव) की संज्ञा दी गई है। उन्होंने बताया कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि पंच-तत्वों में से वह जीवनदायिनी शक्ति है जिसके बिना सृष्टि की कल्पना भी असंभव है। स्वामी जी ने रेखांकित किया कि भगवान शिव की जटाओं से गंगा का निकलना या श्री कृष्ण का यमुना के तट पर लीलाएँ करना, इस बात का प्रतीक है कि हमारी संस्कृति में जल के स्रोतों को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। अतः जल को व्यर्थ करना केवल एक सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि प्रकृति के विरुद्ध एक अधार्मिक कृत्य भी है।

इसी अभियान को व्यावहारिक रूप प्रदान करते हुए साध्वी शंकरप्रीता भारती जी ने 'नीर संरक्षण अभियान' की गतिविधियों और जल बचाने के सटीक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 'संरक्षण' कार्यक्रम का उद्देश्य जन-मानस को यह समझाना है कि भविष्य की जल त्रासदी से बचने के लिए हमें आज ही अपनी आदतों में बदलाव करना होगा। साध्वी जी ने जल की बर्बादी रोकने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जैसे—बाल्टी और मग का उपयोग कर स्नान करना, रसोई और बगीचे में इस्तेमाल किए गए पानी का पुनर्चक्रण (Recycling), वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को अपनाना और नलों के लीकेज को तुरंत ठीक करना। उन्होंने युवाओं और बच्चों को 'वॉटर हीरोज' बनने के लिए प्रेरित किया और कहा कि आत्मिक जागृति ही हमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाती है। अंत में संस्थान के स्वयंसेवकों द्वारा जल बचाने की सामूहिक शपथ ली गई और समाज को यह संदेश दिया गया कि— "जल बचेगा, तभी कल बचेगा।

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