अगर पॉवरकॉम मुनाफे में तो उसकी जमीने क्यों बेचनी पड़ी - तीक्ष्ण सूद



 होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा 
  पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद द्वारा जारी प्रेस नोट में सरकार के वह दावे जिसमे कहा गया है कि पॉवरकॉम मुनाफे में चल रही है को नकारते हुए कहा कि यह सिर्फ आंकड़ों का झूठा खेल है ,दरअसल में पॉवरकॉम की वित्तीय स्थिति बहुत भयंकर रूप से चरमराई हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार के विभागों के ही 2500 करोड़ रु से अधिक बिजली की खपत के बकाये अभी बाकी है। इसी तरह सरकार जो बिजली पर सप्सिडी देती है ,उसके भी करीब 24000 करोड़ रु के बकाये अभी तक पॉवरकॉम को नहीं मिले। इसके अतिरिक्त भारी मात्रा में बिजली चोरी हो रही है। इन सभी बातो का प्रभाव उन उपभोक्ताओ पर पड़ रहा है जो ईमानदारी से अपने बिजली के बिल दे रहे है तथा मुफ्त की बिजली के लाभ नहीं ले रहे। श्री सूद ने सरकार से प्र्शन किया है कि अगर पॉवरकॉम लाभ में है तो इसकी बहूमूल्य करीब 140 एकड़ सम्पतियाँ बेचने पर सरकार क्यों तुली हुई है। सरकारी खजाने तथा पावरकॉम की खस्ता वित्तीय स्थिति के चलते सरकार ने पटियाला की फाटक न. 23 के पास 50 एकड़ तथा लुधियाना , मोहाली की बहुत सी सम्पतियाँ बेचने का फैसला किया था। जिसका पॉवरकॉम के कर्मचारियों की तरफ से भारी विरोध किया गया। अंत में माननीय पंजाब , हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित पटीशन की गई। जिसमें अदालत ने 20 -2 - 2026 को सरकार को पावरकॉम की संपत्तियां बेचने के खिलाफ स्टे जारी कर दिया था। श्री सूद ने कहा कि बिजली बिलों में मात्र कुछ पैसों की कटौती करके चुनावी साल में सरकार बेअर्थ की बाहवाई लूटना चाहती है। जबकि सरकार के ही पॉवरकॉम की तरफ इतने भारी भरकम बकाये है कि पॉवरकॉम इस सरकार की गलत नीतियों के चलते अपने पैरों पर उठकर खड़ा नहीं हो सकती।

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