नेटफ्लिक्स पर प्रसारित फिल्म “घूसखोर पंडित” पर भारी रोष व्यक्त किया गया


होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा 
श्री भगवान परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष शर्मा के नेतृत्व में  बैठक हुई जिसमें 

नेटफ्लिक्स पर प्रसारित फिल्म “घूसखोर पंडित” पर भारी रोष व्यक्त किया गया। आशुतोष शर्मा ने कहा नेटफ्लिक्स पर प्रसारित फिल्म “घूसखोर पंडित”

शीर्षक कोई संयोग नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित मानसिक हमला है। “पंडित” शब्द सनातन संस्कृति, ज्ञान, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। उसे “घूसखोर” जैसे घृणित शब्द से जोड़ना पूरे ब्राह्मण समाज को अपराधी की तरह प्रस्तुत करने की साजिश है। 

बल्कि सीधे तौर पर उच्च पदों पर बैठे ब्राह्मण अधिकारियों, कर्मचारियों और समाज के नेतृत्वकारी वर्ग को बदनाम करने का प्रयास है। यह शीर्षक यह संदेश देने की कोशिश करता है कि सत्ता, प्रशासन और व्यवस्था में बैठे “पंडित” घूसखोर हैं—जो कि एक पूरे समुदाय पर सामूहिक आरोप है।

यह साफ़ है कि फिल्म इंडस्ट्री ने ब्राह्मण समाज को सॉफ्ट टार्गेट मान लिया है और आये दिन ब्राह्मणों को टार्गेट किया जा रहा है । 

यदि यही शीर्षक किसी अन्य समुदाय के नाम पर रखा गया होता, तो न केवल फिल्म बैन होती बल्कि तथाकथित सेक्युलर गैंग सड़कों पर उतर आता। यहाँ यह चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि चुनिंदा समुदायों को अपमानित करना आज फिल्म इंडस्ट्री का एजेंडा बन चुका है।आज की फिल्म इंडस्ट्री रचनात्मकता के नाम पर सनातन, साधु-संत, पंडित और ब्राह्मण समाज के विरुद्ध ज़हर फैलाने का अड्डा बनती जा रही है। कभी पंडित को ढोंगी दिखाया जाता है, कभी लालची, कभी बलात्कारी और अब “घूसखोर”। यह कहानी नहीं, बल्कि चरित्र हत्या का सिलसिला है।

इस पूरे षड्यंत्र में राजनीतिक संरक्षण भी स्पष्ट दिखाई देता है। और इससे भी अधिक शर्मनाक यह है कि राजनीतिक पदों पर बैठे  ब्राह्मण नेता एवम उच्च पदों पर बैठे ब्राह्मण अधिकारियों, कर्मचारियों 

 सत्ता और कुर्सी बचाने के लिए अपने ही समाज के अपमान पर मौन साधे बैठे हैं। ऐसे लोग प्रतिनिधि नहीं, बल्कि समाज के भीतर बैठे कमजोर कड़ी हैं, जिनकी चुप्पी ने ही फिल्म इंडस्ट्री को यह दुस्साहस दिया है।

श्री भगवान परशुराम सेना स्पष्ट शब्दों में

आह्वान करती है कि ऊपर से लेकर नीचे तक—प्रशासन, शिक्षा, न्याय, बैंकिंग, चिकित्सा, सरकारी व निजी क्षेत्रों में कार्यरत प्रत्येक ब्राह्मण कर्मचारी और अधिकारी—को इस शीर्षक के विरुद्ध खुलकर विरोध दर्ज कराना चाहिए, श्री भगवान परशुराम सेना 

 कहती है कि अब यह अपमान सहन नहीं किया जाएगा। शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण समाज कोई प्रयोगशाला नहीं है, जहाँ जब चाहो अपमानजनक प्रयोग कर लिए जाएँ आज यदि ब्राह्मण समाज ने संगठित होकर विरोध नहीं किया, तो आने वाले समय में इससे भी अधिक अपमानजनक शीर्षक और किरदार गढ़े जाएंगे। यह लड़ाई केवल एक फिल्म के नाम की नहीं, बल्कि समाज की प्रतिष्ठा, पहचान और भविष्य की है।

जल्द ही सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया जायेगा और माँग पत्र सौप कर कलाकारों सहित डायरेक्ट, प्रोड्यूसर पर कानूनी कार्रवाई सहित फिल्म को बेन करने की माँग की जायेगी। इस अवसर पर संजय शर्मा, वरुण पंडित, अर्जुन पंडित, समीर पंडित, दीपक पंडित, अजय शर्मा, अनुराग शर्मा, अभिनंदन शर्मा, उमा शंकर, अरुण पंडित, सुरिन्दर शर्मा आदि उपस्थित थे।

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